Punit Bohara

Bio

live & other live... ' Vision without action is dreaming. Action with no vision is just passing time. But with vision and action you can change the world.' स्वयं सत्य को खोजो और सबके साथ मैत्री करो| " Don't count the days, make the days count " - Muhammad Ali ' If your happy and you know it your unusual.' जैसा कर्म भोग होता है, व्यक्ति को वैसा ही साधन, बुद्धि, सहायक एवं स्थान प्राप्त हो जाता है। अपने कर्म का जिम्मेदार जीवात्मा स्वयं ही है। -------------------------------------------- " हे प्रभो ! यह तेरापंथ | पंथ प्रभु का है | हम इस पर चलनेवाले हैं | जो इस पंथ पर चलेंगे, वे तेरापंथी होंगे |" कितनी उदारता ! पंथ में भी कोई ममत्व नहीं | --------------------------------------------- तेरापंथ यानी भिक्षु - दूध-घी का योग है | तेरापंथ की क्या पहचान ? एक गुरु और एक विधान | यह तेरापंथ का देह-परिचय है | तेरापंथ की क्या पहचान ? धर्म अहिंसा, त्याग-प्रधान | यह तेरापंथ का आत्मपरिचय है | ------------------------------------------------- Just as fetter whether made of iron or gold binds a person similarly Karma whether auspicious (punya) or inauspicious (Papa) binds the soul. ------------------------------------------------- "Know Yourself. Be Honest with Yourself. Don't be a teacher or judge", "Be an Example.” ------------------------------------------ गुरु को भाई कि संज्ञा दी गई है| गु का अर्थ है - अंधकार और रु का अर्थ है निवारण| -------------------------------------------- ज्ञान प्राप्ति के अवरोध है - अहंकार, गुस्सा, प्रमाद, नशा, बीमारी व आलस्य| पुरुषार्थ के सामान कोई भाई नहीं है|-------------------------------------- सुन्दर उसे कहा जा सकता है जो सदा एक-रूप हो , प्रवहमान धाराओं के बीच रहता हुआ भी एक रूप रहे | सौंदर्य है प्रवाह और सौन्दर्य है एकरूपता | --------------------------------------- पौरुष के साथ विवेक और साहस का होना अनिवार्य है | ----------------------------------- गुणस्थान आत्मा के विकास की अवस्था है |---------------------------------- ज्ञात और अज्ञात दोनों को सामने रख कर सत्य की व्याख्या करें |-------------------- खाली दिमाग वह होता है, जिसमें न् कोई चिंतन होता है, न् कोई विचार होता है, न् कल्पना और स्मृति होती है | ------------------------------ उसमें केवल अपनी शुद्ध चेतना का अनुभव होता है | जहां शुद्ध चेतना है, वहां शैतान आ ही नहीं सकता |--------- यह है क्रिया का जीवन !!! अपनी बुद्धि से सोच-समझकर स्वतंत्र भावना से जीवन जीना | दुसरे के आधार पर परतंत्र होकर काम नहीं करना |------------ लिखने से पहले सोचो- मैं क्या लिख रहा हूँ? किसके लिए लिख रहा हूँ?---------------- हिंसा के तीन कारण होतें हैं-आभाव, आवेश व अज्ञान|------------------- |हिंसा के तीन क्षेत्रों- धन, वासना व सत्ता पर भी विचार करने की जरूरत है|हमें चाहिए कि हम अनुकम्पा,दया व करुना का विकास करें,जिससे हमारी अहिंसक चेतना का जागरण हो सके|------ वचन के दोष कौन से हैं ? १. असत्य बोलना २. अश्लील/भद्दे शब्दों का प्रयोग करना ३. बिना विचारे बोलना ४. कामोत्तेजक गीत गाना ५. कलहकारी वचन बोलना ६. निरुद्देश्य राजनीति/ भोजन आदि की बात करना------------- दुःख के ८ हेतु हैं | १. अज्ञान, २. मूर्च्छा ३. चंचलता ४. हीनभावना, ५. अहंकार, ६. संस्कार, ७. पूर्वाग्रह ८. रोग | ============= काय सिद्धि का एक मार्ग है सूर्य | ================= माता-पिता, गुरुजन एवं व्रद्वो की सेवा,भक्ति, दान-पूजा, परोपकार, दीन दुःखियों का उत्थान, भाई चारा, वात्सल्य, प्रेम भावना हमारा नैतिक धर्म है।

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